*आशैव राक्षसी पुंसाम्*
*आशैव विषमञ्जरी।*
*आशैव जीर्णमदिरा*
*नैराश्यं परमं सुखम्॥*
अर्थात - प्राणी के लिए आशा ही राक्षसी, विषलता और जीर्ण मदिरा के समान है, अतः अपने जीवन में आशारहित होकर उद्योग करना चाहिए इसी में परम सुख है।
*🙏💐🌻मङ्गल🌻💐🙏*
।। अथ मंगलाष्टक मंत्र ।। ॐ श्रीमत्पङ्कजविष्टरो हरिहरौ वायुर्महेन्द्रोऽनलः चन्द्रो भास्करवित्तपालवरुणाः प्रेताधिपादिग्रहाः। प्रद्युम्नो नल...
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