*आशैव राक्षसी पुंसाम्*
*आशैव विषमञ्जरी।*
*आशैव जीर्णमदिरा*
*नैराश्यं परमं सुखम्॥*
अर्थात - प्राणी के लिए आशा ही राक्षसी, विषलता और जीर्ण मदिरा के समान है, अतः अपने जीवन में आशारहित होकर उद्योग करना चाहिए इसी में परम सुख है।
*🙏💐🌻मङ्गल🌻💐🙏*
करारविन्देन पदारविन्दं मुखारविन्दे विनिवेशयन्तम् । वटस्य पत्रस्य पुटे शयानं बालं मुकुन्दं मनसा स्मरामि ॥ १॥ संहृत्य लोकान्वटपत्रमध्ये शया...
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